“मन की बात” Story for Great Film…

जमाना बीत गया अब कोई अपने “मन की बात” किसी से कहता-सुनता नहीं… कारण आज हमारे मन में लालच और डर समा गया है । बिना लालच के किसी के “मन की बात” हम सुनते ही नहीं और डर के कारण किसी से अपने “मन की बात” कहते नहीं…
आइएं समझें “मन की बात”…
पचपन-छप्पन वर्षीय ‘सर’ कॉलेज की केंटीन में, सामने देखते हैं… उनकी स्टूडेंट कशिश खड़ी है उसे देखते ही कशिश..आओ बैठों ! कशिश, ‘सर’ के सामने बैठती है। इतने में वेटर ‘सर’ को चाय देता है ।
‘सर’ वेटर को रुकने का इशारा कर, कशिश से.. क्या लोगी जो तुम्हें पसन्द हों !
कशिश कुछ नहीं ‘सर’ इसी बीच ‘सर’ चाय कप से प्लेट में डाल कर आधा कप चाय कशिश को देते है, दोनों चाय पीते है ।
कशिश ‘सर’ आपसे अपने “मन की बात” कहना है…
‘सर’ हां.. कहियें बच्चे क्या बात है ?
कशिश: सर एक लड़का है !
सर: अपने कॉलेज से ही हैं ?
कशिश, नहीं हमारे कॉलेज से नहीं है । बहुत प्यारा सा.. मुझे बहुत चाहता है। हम दोनों शादी करना चाहते है उसने अपनी मां से मिलवाया है मुझें, मम्मीजी भी बहुत अच्छी है, मुझे पसन्द भी करती हैं।
मेरी मम्मी नहीं है, वें मेरे पापा से मिलकर रिस्ता करना चाहते है…
परन्तु मेरे पहलवान पापा को कोई ओर पसन्द है, उन्हें मालूम पड़ेगा तो मना कर देंगे। फ़िर भी वह नहीं माना तो हड्डियां तोड़ देंगे बैचरे की। प्लीज़ आप ही कुछ कीजिए ‘सर’..प्लीज़।
‘सर’ क्या करता है वह?
कशिश, शरमाते हुए.. यह विजिटिंग कार्ड…
‘सर’ कार्ड देखते हुए.. विनोद मेहरा क्रियेटिव हेड.. Dash-Adverting..
अच्छा कशिश तुमने जानने की कोशिश की है, तुम्हारे पापा क्या चाहतें हैं ? कभी उनसे बात करने की पहल की है, बच्चें ? एक पिता हमेशा अपने बच्चों का भला ही चाहता है। फिर अपने पिता से इतनी दूरी, इतना अविश्वास क्यों ?
कशिश, ‘सर’ वो क्या है… पिताजी ने बचपन से आज तक मुझसे प्यार से बात नहीं की। उनका नेचर है, हमेशा रुआब से चिल्लाकर ही बोलतें है.. डर लगता हैं ‘सर’…! ओर कशिश की आंखें भीग जाती हैं.. (मन ही मन में अपने आपसे)

काश… मेंरे पापा भी आपके कैसे होते… एक दोस्त की तरह मेरे “मन की बात” समझने और जानने की कोशिश करते… काश ऐसा होता..!
‘सर’ स्नेह से, निश्चिंत रहो मैं बात करता हूं.. तुम्हारे पहलवान पापा और उस मजनू से भी.. अगले ही दिन ‘सर’ विनोद मेहरा और उसकी मम्मी के साथ कशिश के पिता से मिलकर दोनों के मन की बात बता कर.. दोनों का विवाह तय करवातें है… आज दोनों बहुत खुश हैं..
आपस में अपनों के  ” मन की बात” जान समझकर, खुशियां बाटने से खुशियां बड़ती है।

कॉपीराइट हेमन्त मोढ़…